गांव उलाईखेड़ा के ग्रामीण और तहसील की टी
विस्तार
बदायूं के कादरचौक क्षेत्र के उलाईखेड़ा गांव के किसानों की भागदौड़ रंग लाने लगी है। पिछले 20 साल से वे जिस जमीन की खातिर अधिकारियों के चक्कर लगा रहे थे, अब वो उन्हें मिलने जा रही है। तहसील प्रशासन के लगातार नपत कराए जाने के बाद अब तक 20 किसानों को उनकी जमीन मिल चुकी है। नायब तहसीलदार का दावा है कि वास्तव में जो किसान हकदार हैं, उन्हें लगातार अभियान चलाकर जमीन दिलाई जाएगी।
ब्लॉक क्षेत्र का उलाईखेड़ा गांव का न तो नक्शा है और न ही किसानों के नाम खतौनी में दर्ज हैं, जहां पर जिस व्यक्ति का कब्जा है, वह लगातार वहां फसल करता आ रहा है। इस जमीन को लेकर कई लोगों का खून भी बह चुका है। अधिकतर कब्जेदार राजनीति से जुड़े हैं, उनमें ज्यादातर लोग कासगंज के रहने वाले हैं। वह एक साथ 15-20 या 50 लोग इकट्ठे होकर आते हैं और असलहों के बल पर जमीन की जुताई करते हैं। फसल की बुआई करते हैं और चले जाते हैं। वह कभी अकेले नहीं आते। गेहूं की फसल तो सीधे कंबाइन से कटवाकर ले जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यहां करीब चार हजार से ज्यादा बीघा जमीन पर दबंगों का कब्जा है। गांव और आसपास के करीब तीन-चार सौ किसानों के नाम इस जमीन का पट्टा है। उनके नाम की रसीदें रखी हैं लेकिन कभी उनको कब्जा नहीं मिला। वह पिछले 20 साल से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। पिछले साल अमर उजाला ने किसानों की इस पीड़ा को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस पर तहसील प्रशासन ने पूरे गांव की जमीन की नपत कराई। पूरे रकबे की जांच कराई। इसका नतीजा यह रहा कि अब किसानों को उनके हक की जमीन मिलना शुरू हो गई है।
Lohia Nama