लोकप्रिय गायक और आध्यात्मिक चिंतक डॉ. कुमार विश्वास
मौजूदा दौर में रूमानी गीतों के लोकप्रिय गायक और आध्यात्मिक चिंतक डॉ. कुमार विश्वास का कहना है कि उन्हें कविता में आनंद आता है तो रामकथा-कृष्ण कथा में परमानंद आता है। कविता तात्कालिक रूप से मन को प्रसन्न करती है जबकि कथा आत्मा की शाश्वत खुराक है।
मुझे दोनों ही अच्छी लगती हैं। जब समाज में किसी व्यक्ति को नायकत्व मिल जाता है तो उसका दायित्व है कि वह अपने जैसे और लोग समाज को दे। मुझे देख सुन कर नई पीढ़ी के लोग गीतों और मुक्तकों के रचनाकर्म में उतरते हैं तो यही मेरा साध्य है। मेरी रामकथा से परिवार बिखरने से बचता है तो मुझे संतोष मिलता है।
डॉ. कुमार विश्वास से जब यह पूछा गया कि वह अपनी कविताओं और गीतों का मूल्यांकन साहित्यिक अथवा लोकप्रिय रचना में किस श्रेणी में करते हैं तो उनका कहना था कि वह लोकप्रिय कविता और साहित्यिक कविता की विभाजनरेखा नहीं मानते। कौन सी रचना किस दौर में लोकप्रिय हो या साहित्यिक श्रेणी में शामिल हो, यह तो केवल समय तय करता है।
जब तुलसी ने संस्कृत की जगह अवधी में रामचरित मानस लिखी तो उस वक्त उनका मजाक उड़ाया गया। कबीर को भी बहुत बाद में साहित्यकार माना गया। केशव दास के तो नौकर-चाकर भी संस्कृत बोलते थे। खुद को भाषा में कविता करने की वजह से खुद को जड़मति करार दिया। लेकिन सब को साहित्य ने अंगीकार किया।
Lohia Nama