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Gorakhpur News: राजघाट में ऑयल पेंट से बनी प्रतिमाओं को गड्ढे में न दबाया तो फैलेगा प्रदूषण, करनी होंगी नष्ट

 

कृत्रिम तालाब में सड़ रहे अवशेष।

गोरखपुर जिले में राप्ती नदी के किनारे बनाए गए कृत्रिम तालाब में सड़ रहे अवशेषों का अगर जल्दी निस्तारण नहीं किया गया तो यह वायु के अलावा जल प्रदूषण का भी कारण बनेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि तालाब में पड़ीं पीओपी और पेंट से बनी प्रतिमाओं को नष्ट करना आसान नहीं है। इसके लिए इन्हें गड्ढे में दबाना होगा। ऐसा इसलिए कि ऑयल पेंट पानी में घुलनशील नहीं होता है।

इन अवशेषों से उत्सर्जित गैसों का असर ओजोन परत पर भी होता है, इसीलिए इनका सुरक्षित तरीके से निस्तारण बेहद जरूरी है। इस मामले में अभी तक न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से कोई पहल की गई है और न ही नगर निगम या प्रशासन की ओर से ही। मजबूरी में लोग नाक पर रुमाल रखकर उधर से गुजरने को मजबूर हैं।

दशहरा और लक्ष्मी पूजा के लिए बनी देवी प्रतिमाओं का विसर्जन राप्ती नदी में न हो, इसके लिए एकला बांध के किनारे तीन कृत्रिम तालाब बनाए गए थे। इन तालाबों में पहले दुर्गा प्रतिमाएं और फिर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं विसर्जित की गईं।

 

प्रतिमा विसर्जन के बाद तालाब के पानी में सड़ने वाले पदार्थों को बाहर निकालकर उन्हें गड्ढा खोदकर दबाना था। लेकिन ऐसा करने की बजाय तालाब के किनारे जमा अवशेषों पर ब्लीचिंग पाउडर आदि का छिड़काव कर छोड़ दिया गया। विसर्जित की गई प्रतिमाओं के साथ कपड़ा, फूल, चावल, वस्त्र आदि भी तालाब में डाले गए थे, जो अब सड़ने लगे हैं।

इसकी दुर्गंध के चलते अगल-बगल से गुजरने वालों को दिक्कत हो रही है। एकला बांध पर पहले से ही शहर का कूड़ा गिराया जाता है, अब बगल में पानी भी सड़ने लगा है। इसकी वजह से अगल-बगल वालों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं।

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